Lohit Mandal / Sat, Jan 6, 2024 / Post views : 791
से उन गतिविधियों को अपने बच्चों को कराते रहने की कला सीखी ।
सभी जिलों से आई महिला शिक्षिकाओं का उत्साह वर्धन करते हुए सरगुजा संभाग के जेड़ी श्री हेमंत उपाध्याय जी ने कहा कि माता ही बच्चों की प्रथम गुरु होती है और वही बच्चे का सर्वांगीण विकास कर सकती है। विद्यालय आने से पूर्व बच्चा माता की गोद में ही जीवन के सारी क्रियाकलाप सीखना आरंभ करता है, इसलिए बच्चों के सीखने में माता अहम भूमिका निभा सकती है ।इस कार्यक्रम के माध्यम से सरगुजा क्षेत्र की माताएं भी बच्चों के सीखने में भरपूर सहयोग करेंगी और बच्चों के सीखने के स्तर में वृद्धि होगी। सरगुजा डीएमसी श्री रविशंकर तिवारी जी ने कहा यह नई शिक्षा नीति के उद्देश्यों को पूरा करने वाली बुनियादी स्तर परबच्चों को खेल-खेल में उसकी आयु अनुसार शिक्षण देने का समग्र शिक्षा का महत्वपूर्ण कदम है। यह कार्यक्रम बच्चों को शालाओं में आने से पूर्व की तैयारी सहित कक्षा 1 एवं 2 के बच्चों को मनोरंजक, खेल-खेल में सीखने का आवसर प्रदान करती है, जिसमें माताएं शिक्षक होती हैं। अतः इस कार्यक्रम को जिस तरह विगत वर्षों में आप सबने सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचाया है ,उसी तरह इस वर्ष भी जमीनी स्तर पर आप सभी अधिक से अधिक मेहनत करें और इस कार्यक्रम को सफल बनाएं। प्रशिक्षण की SRG अनिता तिवारी एवं प्रमिला कुशवाहा थीं, जिन्होंने बड़ी कुशलता के साथ आनंददाई माहौल में प्रशिक्षण संपन्न कराया।इस अवसर पर एपीसी प्रशिक्षण दीपमाला सिंह प्रथम संस्था के स्टेट हेड श्री गौरव शर्मा एवं श्रवन पांडे, श्याम लाल चंद्रा उपस्थित रहे।विज्ञापन
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