Lohit Mandal / Thu, Feb 15, 2024 / Post views : 1307
आपको बतादे कि स्कूल परिसर मे यंहा का प्राकृतिक वातावरण देखकर एक पाजिटीव ऊर्जा उत्पन्न होती है जिससे बच्चो को पढ़ने और पढ़ाने में एक अलग उत्साह आता है यहां स्कूल परिसर में खुले में घूमते हुए खरगोश,सफेद चूहा,बतख, तर्की,विभिन्न प्रजाति के कबूतर स्कूल की शोभा बढ़ा रहे है। स्कूल में बच्चों की पढ़ाई और रिजल्ट देखकर क्षेत्र के साथ-साथ अब अन्य जिलों के पालक भी अपने बच्चो को लामिखार गांव में रहकर अच्छी शिक्षा दिलवा रहे है, बाहरी बच्चो की इतनी संख्या हो गई है की लामीखार गांव में अब कोई घर खाली नही बचा, जिससे बाहरी बच्चो को निराशा भी हो रही है।
26 जनवरी को छाल तहसीलदार महेंद्र लहरे समस्त छाल राजस्व स्टॉफ द्वारा स्कूल प्रांगर आकर बच्चो से मिले थे जिससे लामीखार का नजारा देखकर उन्हें बहुत अच्छा लगा जिससे प्रभावित होकर आज गुरुवार को महेंद्र लहरे और उनके राजस्व स्टॉफ द्वारा स्कूल आकार सभी बच्चो को स्कूल ड्रेस, ब्लेजर , टाई, जूता, बैग और स्कूल प्रांगण के लिए सैकड़ों पौधे का सहयोग किया महेंद्र लहरे द्वारा बोला गया की सरकारी स्कूल होने के बावजूद अच्छा शिक्षा और निजी स्कूलों की तुलना में किसी से कम नही, मैने तो अभी शुरुवात की है आगे बच्चो के लिए मुझसे जो बनेगा और भी इस स्कूल के लिए करूंगा सरकारी स्कूल में अलग से जान डालने वाले शिक्षक निरंजन पटेल और प्रदीप पटेल की दिल से सराहना की जिन्होंने शिक्षा को एक अलग पहचान दिया है इसी तरह और भी सरकारी स्कूलों के शिक्षको को पहल करना चाहिए।विज्ञापन
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